लुगू बुरू घांटा बाड़ी धोरोम गाढ़संस्था के उद्देश्य

1. सामाजिक उद्देश्य
क. आदिवासी संस्कृति एवं धार्मिक परम्पराओं के प्रचार प्रसार हेतु सांस्कृतिक आयोजन जैसे मेला, घर्म सभा इत्यादि का आयोजन करना। संथाली भाषा ओलचिकी के विकास एवं इससे आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
ख. पौराणकि धर्म स्थलों, जनजातिय कानुन, मांझी प्ररगाना, मुण्डा मानकी, पाहन परगणेत की अवधारना की रक्षा, संरक्षण एवं इसका विकास करना।
ग. सामाजिक कुरितियों जैसे – दहेज प्रथा, नशाखेरी, बाल विवाह, डायन प्रथा आदि को समाप्त करने की दिशा मे कार्य करना, महिला सशक्तीकरण एवं करने हेतु विभिन्न प्रकार के प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल कराने के लिए शिक्षण की व्यवस्था करना।

2. स्वरोजगार
क. स्त्री तथा पुरूषों के लिए स्वंय सहायता समुहों का गठन करना। बेरोजगार युवक-युवतियों स्त्री-पुरूषों को स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण की व्यवस्था करना तथा लघु उद्योग, घरेलु उद्योग की स्थापना करना एवं उसे बढ़ावा देना।

3. प्रर्यावरण
क. जल जंगल एवं जमीन की रक्षा एवं प्रदुषण नियंत्रण हेतु कार्य करना। इस हेतु वृक्ष रोपन को बढ़ावा देना, औषधीय पौधे सहित विभिन्न प्रकार के पौधे लगाना।
ख. प्रदुषण नियंत्रण हेतु शौचालय एवं स्नानागार का निर्माण करना।

लुगू बुरू घांटा बाड़ी धोरोम गाढ़ की नियमावली

1. परिभाषा:-
क. संस्था से अभिप्राय : लुगू बुरू घांटा बाड़ी धोरोम गाढ़
ख. समिति से अभिप्राय : संस्था की कार्यकारिणी समिती।
ग. वित्तीय वर्ष से अभिप्राय : 01 अप्रैल से 31 मार्च।
घ. आम सभा से अभिप्राय : संस्था के सभी सदस्यों से बनी सभा।
ड़. पदाधिकारी से अभिप्राय : अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष।
च. अधिनियम से अभिप्राय : संस्था निबंधन अधिनियम 21,1860.

2. कार्य कारिणी समिति का गठन:-
क. संस्था की कार्यकारिणी समिति में पदाधिकारियों (अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) सहित कुल 11 सदस्य होंगे।
ख. कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल 5 (पाँच) वर्षों की होगी।
ग. काय्रकारिणी समिति का पदाधिकारियों एवं सदस्यों का चुनाव आम सभा द्वारा होगा। निवृत सदस्य पुनाः चुने जा सकते हैं।

3. कार्यकारिणी समिति का कार्य एवं अधिकार:-
क. संस्था के कार्यो एवं योजनाओं पर निगरानी रखना एवं संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपेक्षित निर्देश देना।
ख. संस्था के चल या अचल सम्पत्ति के लिए उत्तरदायी होना।
ग. संस्था के सभी कार्यो का सम्पादन विधिवत करना और प्रस्ताव पारित करना एवं आवश्यकतानुसार उपसमिति का गठन करना।
घ. संस्थ के विरूध आचरन करने वाले या अनैतिक कार्य करने वाले सदस्यों के विरूद्ध आविश्वास प्रस्ताव पारित करना।
ड़. आमसभा की बैठक की तिथि, स्थान एवं कार्यवाली निर्धारित करना।
च. संस्था की बैठक की योजना एवं बजट तैयार एवं पारित कर आमसभा के समक्ष रखना।
छ. संस्था के स्मृति पत्र एवं नियमावली में संशोधन एवं संस्था के विघटन के संबंध में अपनी अनुशंसा आमसभा के पास भेजना।
ज. उद्देश्यो की पुर्ति हेतु अन्य वैधानिक कार्य करना।
झ. आमसभा द्वारा पारित प्रस्तावों केा कार्यरूप देना।
न. यदि कार्यकाल पूरा करने के पुर्व किसी कारण वश समिति में कोई पद रिक्त होगा तो कार्य कारिणी समिति उक्त पद पर किसी व्यक्ति को मनोनित कर सकती है। लेकिन आम सभा की वाषिक बैठक मे उसे विधिवत पारित करना होगा। मनोनीत सदस्य उसी पद के अनुरूप कार्य करेगें जिस पद के लिए उनका मनोनयन किया गया है।

4. पदाधिरियों के कार्य एवं अधिकार:-
. अध्यक्ष
1. संस्था के प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता करना।
2. संस्था के कार्यवाही पंजी में हस्ताक्षर करना।
3. किसी बैठक में समान मत की स्थिति मे निर्णायक मत देना।
4. संस्था की गतिविधियों पर निगरानी रखना।
5. सचिव को कर्मचारियों की नियुक्ति एवं बरखास्तगी में सहयोग प्रदान करना।
6. किसी भी तरह की बैठक बुलाने हेतु समय-समय पर सचिव को परामर्श देना
7. आवश्यकतानुसार किसी भी अधिकारी या दूसरे संगठन की बैठक में संस्था का प्रतिनिधित्व करना।
8. समय-समय पर कार्यकारिणी समिति द्वारा सौपें गये कार्यों एवं दायित्वों को पूरा करना।

. उपाध्यक्ष
1. अध्यक्ष की अनुपस्थित मे बैठक की अध्यक्षता करना।
2. संस्था के गतिविधियों पर निगरानी रखना।
3. सचिव केा कर्मचारियों की नियुक्ति एवं बरखास्तगी में सहयोग प्रदान करना।

. सचिव
1. बैठक का आयोजन करना।
2. अध्यक्ष की राय मे अन्य कार्य करना।
3. संस्था की ओर से पत्राचार करना।
4. प्रत्येक पंजी एवं कागजात केा सुरक्षीत रखना।
5. संस्था की आय-व्यय का अंकेक्षण कराना।
6. अध्यक्ष से हस्ताक्षर कराकर अपना हस्ताक्षर करना।
7. बैठक के कार्यवाही को कार्यवाही पंजी मे अंकित करना।
8. आवश्यकता पड़ने पर समिति के बिना पुर्व अनुमती के 1000/- (एक हजार) रूपये तक खर्च कर सकते हैं, लेकिन अगामी बैठक में इसकी स्वीकृति ले लेना अनिवार्य होगा।

. कोषाध्यक्ष
1. कार्यकारीणी समिति द्वारा सौपे गये वित्तिय कार्यो एवं दायित्वों को पूरा करना।
2. समिति के आय-व्यय का हिसाब रखना, आय व्यय का लेखा तैयार करने में एवं सुरक्षित रखने मे सचिव को सहयोग करना।
3. आम सभा मे आय-व्यय लेखा प्रस्तुत करने में सचिव को सहयोग करना उसे बैठक में रखना तथा पुछे गये प्रश्नो का उत्तर देना।
4. सदस्यता शुल्क इत्यादि प्राप्त कर रसीद देना।
5. समिति का कोष किसी निर्धारित बैंक या डाकघर में समिति के नाम पर जमा करना तथा आवश्यकता पड़ने पर सचिव या अध्यक्ष एवं अपने सयुंक्त हस्ताक्षर से संस्था के खाते से किसी रकम की निकासी करना।
6. कार्यकारिणी की बैठक में वित्तीय विषयो पर उत्तर देना।
7. आय के नये स्त्रोंतों की खोज करना एवं तत्त्संबधी परामर्श कार्यकारिणी को देना।
8. संस्था के लेखा का अकेंक्षण कराना एवं संबंधित प्रहतवेदन आम सभा मे रखना।
5. आम सभा का कार्य एवं अधिकार
क. कार्य कारिणी के समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का निर्वाचन करना।
ख. संस्था की योजना, बजट, अंकेक्षित लेखा एवंप्रगति प्रतिवेदन को पारित करना।
ग. संस्था की लेखा के अंकेक्षण हेतु आम सभा के 3/5 सदस्यो की सहमति से अंकेक्षक की नियुक्ति करना।
घ. संस्था के स्मृति पत्र एव नियंमावली मे संशेधन करना।
ड़. संस्था के विघटन पर न्याय लेना।
च. अध्यक्ष की राय से अन्य विषयांे पर विचार करना।
छ. संस्था के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन को पारित करना।

6. आम सभा की बैठकें:-
आम सभा के 1/3 सदस्यों के लिखित मांग, जिसमे अधोयाचना करने वाले सदस्यो का हस्ताक्षर एवं बैठक से विचारणीय बिन्दु का स्पष्ट उल्लेख रहेगा, पर अधियाचना प्राप्ति के 30 दिनो के अन्दर संस्था के सचिव को आम सभा की बैठक बुलानी होगी। यदि तीस दिनों के अन्दर संस्था द्वारा बैठक नही बुलाई जायेगी तब अधीयाचना करने वाले सदस्यो को अधिकार होगा कि आम सभा के सभी सदस्यो को सुचना भेजकर आम सभा की अधियाचित बैठक में अधियाचन में अकिंत विषय पर निर्णय ले सकते है।

7. कार्यकारिणी समिति की बैठक:-
क. कार्यकारिणी समिति की बैठक प्रत्येक माह होगी, जिसकी सुचना कम से कम सात दिन पूर्व दी जायेगी। बैठक मे भाग लेना सभी सदस्य के लिए अनिवार्य है।
ख. आवश्यकता पड़ने पर बैठक कभी भी बुलायी जा सकती है। जिसकी सुचना कम से कम 48 घंटे पूर्व दी जायेगी।
ग. सुचना डाक द्वारा तथा सुचना बही पर हस्ताक्षर प्राप्त कर या विशेष दूत या अन्य किसी संचार माध्यम द्वारा दिया जा सकता है।

8. कोष की व्यवस्था बैक खाते का संचालन:
संस्था केा प्राप्त होने वाली सभी राशियाँ संस्था के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक/डाकघर में खुले खाते मे रखी जायेगी। उक्त खातों का संचालन अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष के द्वारा सयुक्त रूप से होगा, परन्तु निकासी किन्ही दो पदाधिकारी के सयुंक्त हस्ताक्षर से होगी जिसमें कोषाध्यक्ष का हस्ताक्षर अनिवार्य होगी।
9. कानुनी कारवाई:-
संस्था द्वारा या संस्था के विरूद्ध केाई भी कानुनी कारवाई संस्था के सचिव के पदनाम से होगी।